यहाँ ‘दो बैलों की कथा’ पाठ (लेखक: प्रेमचंद) के अभ्यास-प्रश्नों के सभी भागों के संपूर्ण उत्तर दिए गए हैं।
पाठ १ :- दो बैलों की कथा
रचना से संवाद: मेरे उत्तर मेरे तर्क (बहुविकल्पीय प्रश्न)
1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
(ख) एकता और सहयोग
(ग) गर्व और दंभ
(घ) विद्रोह और क्रोध
- उत्तर: (ख) एकता और सहयोग।
- तर्क: कहानी में दोनों बैल हमेशा मिलकर काम करते हैं, मुसीबत में एक-दूसरे की जान बचाते हैं (जैसे साँड़ से लड़ते समय) और मूक भाषा में एक-दूसरे की स्थिति को समझते हैं।
2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।
(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
- उत्तर: (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
- तर्क: वे झूरी को बहुत प्रेम करते थे। जब झूरी ने उन्हें अपने साले ‘गया’ के पास भेजा, तो उन्हें लगा कि उनके मालिक ने उन्हें बिना किसी गलती के बेच दिया है, जो उनके लिए अत्यंत अपमानजनक और दुखदायी था।
3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
(क) कष्टों से बचने के लिए
(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए
(ग) अभिमान की रक्षा के लिए
(घ) अपनापन पाने के लिए
- उत्तर: (घ) अपनापन पाने के लिए (तथा स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए)।
- तर्क: गया के घर में नया गाँव और नए आदमी उन्हें बेगाने लगते थे। उनका दिल भारी हो गया था क्योंकि जो उनका ‘अपना घर’ था, वह छूट गया था। उसी ‘अपनेपन’ (झूरी के प्रेम) को पाने के लिए वे भाग निकले।
4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
(क) स्वाभिमान
(ख) अहिंसा
(ग) पराधीनता
(घ) अन्याय की रक्षा
- उत्तर: (क) स्वाभिमान।
- तर्क: जब गया ने बिना कारण हीरा की नाक पर डंडे बरसाए, तो मोती अपने और अपने मित्र के स्वाभिमान पर हुए इस चोट को सह नहीं पाया और हल लेकर भाग खड़ा हुआ।
5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?
(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए
(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
- उत्तर: (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए।
- तर्क: प्रेमचंद यह दर्शाना चाहते थे कि पशुओं में भी मनुष्यों के समान भावनाएँ, विचार, और संवाद करने की चेतना होती है।
6. ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के
(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के
(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के
(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
- उत्तर: (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के।
- तर्क: जिस प्रकार भारतीय जनता ने अपनी आज़ादी के लिए अनगिनत कष्ट सहे और बार-बार संघर्ष किया, उसी प्रकार हीरा और मोती ने भी गुलामी से मुक्त होने के लिए हर संभव विद्रोह किया।
मेरी समझ मेरे विचार
1. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
- उत्तर: बैलों ने काम करने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि वे अपने पुराने मालिक झूरी से बिछड़कर दुखी थे। साथ ही, गया ने उनके साथ कठोरता का व्यवहार किया था, उन्हें मारा-पीटा था और खाने के लिए केवल सूखा भूसा दिया था, जिससे उनके आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुँची थी।
2. “गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?
- उत्तर: पशुओं का अपने मालिक के प्रति इतना असीम प्रेम और स्वामीभक्ति दिखाना कि वे दूर अजनबी जगह से मजबूत रस्सियाँ तोड़कर रातों-रात वापस अपने घर लौट आएँ, साधारण घटना नहीं है। यह घटना सिद्ध करती है कि प्रेम और अपनत्व की भाषा पशु भी भली-भाँति समझते हैं।
3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा- अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” ‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ इस कथन को सिद्ध कीजिए।
- उत्तर: जब गया ने निर्दयता की सारी सीमाएँ पार करते हुए बैलों पर डंडे बरसाए और उन्हें लगातार सूखा भूसा दिया, तो बैलों के लिए स्थिति असहनीय हो गई। यह दर्शाता है कि जब कोई व्यक्ति आपके सीधेपन का फायदा उठाकर आप पर अमानवीय अत्याचार करने लगे, तो आत्मरक्षा और सम्मान के लिए विद्रोह या संघर्ष करना अनिवार्य हो जाता है।
4. “जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
- उत्तर: यद्यपि वे दोनों भावनाओं से प्रेरित थे, किंतु वे ‘स्वतंत्रता’ से अधिक प्रेरित प्रतीत होते हैं। गया के घर से भागने के बाद भी वे आज़ाद होकर मटर के खेत में उछल-कूद रहे थे और काँजीहौस में भी अपनी जान की परवाह किए बिना उन्होंने दीवार तोड़कर सभी जानवरों को आज़ाद किया। स्वतंत्रता उनका जन्मसिद्ध अधिकार और सबसे बड़ी प्रेरणा थी।
5. “बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” ‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’- क्या आप इस कथन से सहमत हैं?
- उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। यदि हीरा और मोती गया के अत्याचार को चुपचाप सहते रहते, तो गया उन्हें हमेशा प्रताड़ित करता रहता। विरोध करके उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि वे अन्याय के सामने नहीं झुकेंगे।
6. हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? तीन बिंदु लिखिए।
- उत्तर:
- दोनों नाँद में एक साथ मुँह डालते थे और एक के हटा लेने पर दूसरा भी हटा लेता था।
- जब विशाल साँड़ ने हमला किया, तो दोनों ने मिलकर एक-दूसरे का बचाव किया और साँड़ को खदेड़ दिया।
- काँजीहौस की दीवार टूटने के बाद भी मोती भाग सकता था, लेकिन हीरा के बँधे होने के कारण वह भी वहीं रुक गया और अपने मित्र का साथ नहीं छोड़ा।
7. “उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
- उत्तर: मालकिन (झूरी की पत्नी) का व्यवहार शुरुआत में स्वार्थी और क्रोधी था; उसने बैलों के भागकर आने पर उन्हें ‘नमकहराम’ कहा और सूखा भूसा खाने को दिया। इसके विपरीत, छोटी लड़की (भैरो की बेटी) अत्यधिक करुणामयी और संवेदनशील थी; सौतेली माँ के दुर्व्यवहार के कारण वह बैलों का दुख समझती थी और उन्हें रोटियाँ खिलाकर सच्चा प्रेम देती थी।
मेरी कल्पना मेरे अनुमान
1. यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
- उत्तर: यदि मैं छोटी लड़की होता, तो मैं भी बैलों को चुपके से खाने-पीने की वस्तुएँ देता। इसके अतिरिक्त, मैं अपने पिता और घर के अन्य सदस्यों को समझाता कि जानवरों के साथ क्रूरता का व्यवहार नहीं करना चाहिए और उन्हें वापस उनके असली मालिक के पास भेज देना चाहिए।
2. “दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप सहमत हैं?
- उत्तर: हाँ, यह कथन शत-प्रतिशत सत्य है। काँजीहौस में दीवार टूटने और आज़ादी का मार्ग खुलने के बाद भी गधे इसलिए नहीं भागे क्योंकि उन्हें फिर से पकड़े जाने और मारे जाने का भय था। इसी प्रकार, असल जीवन में भी मनुष्य असफलता के डर और संकोच के कारण गुलामी या शोषण की स्थिति से बाहर निकलने का प्रयास नहीं कर पाता।
मेरे अनुभव मेरे विचार
1. “दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है…।” क्या आप इस बात से सहमत हैं?
- उत्तर: हाँ, मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ। सच्ची मित्रता में किसी प्रकार की औपचारिकता या दिखावा नहीं होता। हँसी-मज़ाक, एक-दूसरे को तंग करना और (धौल-धप्पा) मित्रवत नोक-झोंक ही इस बात का प्रमाण है कि मित्र एक-दूसरे पर पूरा विश्वास करते हैं और उनके बीच कोई संकोच नहीं है।
2. “गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए” बनाम “बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।” आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं?
- उत्तर: मैं हीरा (गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना) के विचारों के अधिक निकट हूँ। यह भारतीय संस्कृति के क्षमा और नैतिकता के मूल्यों को दर्शाता है। निहत्थे या परास्त हो चुके शत्रु पर वार करना कायरता है। हालाँकि, मोती का विचार अपनी आत्मरक्षा के लिए यथार्थवादी है, लेकिन क्षमाशीलता ही मनुष्यता (या जीवत्व) को महान बनाती है।
3. “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” (अपने अनुभव के आधार पर उत्तर)
- उत्तर: (छात्र का अनुभव) हाँ, एक बार परीक्षा के समय मेरे सबसे अच्छे मित्र के नोट्स खो गए थे। मैं चाहता तो अपनी पढ़ाई करके अच्छे अंक ला सकता था, लेकिन मैंने अपने नोट्स उसके साथ साझा किए और हम दोनों ने साथ मिलकर पढ़ाई की। विपत्ति में सच्चे मित्र का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
विधा से संवाद: कहानी की पड़ताल
कहानी की रूपरेखा पूरी कीजिए:
- शीर्षक और लेखक: दो बैलों की कथा, प्रेमचंद
- विषय: पशुओं की स्वामीभक्ति, मित्रता और स्वतंत्रता के लिए किया गया अनवरत संघर्ष
- परिवेश/देश-काल और मुख्य विचार: स्वतंत्रता-पूर्व भारतीय ग्रामीण समाज। मुख्य विचार: स्वतंत्रता सहज रूप से नहीं मिलती, इसके लिए बार-बार कड़ा संघर्ष करना पड़ता है।
- चरित्र/पात्र: हीरा, मोती (बैल), झूरी, गया, झूरी की पत्नी, दढ़ियल कसाई, छोटी लड़की (भैरो की बेटी)।
- परिणाम: अनेक कष्ट सहकर और संघर्षों को पार करते हुए अंततः हीरा और मोती आजाद होकर अपने घर (झूरी के पास) पहुँच जाते हैं।
कहानी का सौंदर्य (तालिका)
- चित्रात्मक भाषा: 1. घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं। 2. सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली।
- संवादात्मकता: 1. “मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।” 2. “मुझे मारेगा, तो मैं भी एक-दो को गिरा दूँगा!” – “नहीं। हमारी जाति का यह धर्म नहीं है।”
- विरोधाभास: 1. झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गद्गद हो गया। झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी। 2. वह मारते-मारते थक गया; पर दोनों ने पाँव न उठाया।
- व्यंग्य: 1. भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है? अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते तो शायद सभ्य कहलाने लगते। 2. जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिहीन समझा जाता है।
- संघर्ष: 1. उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है; लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं नजर आती। (बैल बनाम साँड़) 2. दढ़ियल झल्लाकर बैलों को जबरदस्ती पकड़ ले जाने के लिए बढ़ा। उसी वक्त मोती ने सींग चलाया।
- अतिशयोक्ति: 1. झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे। 2. ऋषियों-मुनियों के जितने गुण हैं, वे सभी उसमें (गधे में) पराकाष्ठा को पहुँच गए हैं।
- संदेह/उलझन: 1. सारा दिन बीत गया और खाने को एक तिनका भी न मिला। समझ ही में न आता था, यह कैसा स्वामी है? 2. अपना यों बेचा जाना उन्हें अच्छा लगा या बुरा, कौन जाने…
कहानी की रचना
कहानी के प्रारंभ में संकेत:
- उत्तर: कहानी के बिलकुल प्रारंभ में ही लेखक गधे और बैल के स्वभाव पर चर्चा करता है (“जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिहीन समझा जाता है… लेकिन गधे का एक छोटा भाई और भी है, और वह है ‘बैल'”)। इसी वर्णन से यह संकेत मिल जाता है कि कहानी के मुख्य पात्र जानवर (बैल) हैं और कहानी में उनके सीधेपन, शोषण और उसके विरुद्ध उनके विद्रोह को आधार बनाया जाएगा।
विषयों से संवाद: कहानी का समय और समाज (मिलान)
- जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। -> 6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए।
- मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। -> 5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य।
- हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। -> 4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी।
- दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। -> 2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया।
- इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। -> 1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी।
- साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। -> 3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया।
पशुओं के लिए कानून
1. बैलों का काँजीहौस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
- उत्तर: न्याय: बैलों ने मटर के खेत में घुसकर फसल का नुकसान किया था, इसलिए व्यवस्था के अनुसार उन्हें काँजीहौस (मवेशीखाने) में बंद करना न्यायसंगत था। अन्याय: वहाँ उन्हें हफ्तों तक बिना चारे के भूखा रखना, डंडों से पीटना और अंत में बेरहमी से एक कसाई (दढ़ियल) के हाथों नीलाम कर देना घोर अन्याय था।
2. आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
- उत्तर: मैं ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम’ (Prevention of Cruelty to Animals Act) के तहत उनके लिए भरपेट भोजन, साफ पानी, सुरक्षित आश्रय, और मार-पीट तथा अमानवीय क्रूरता से मुक्ति का अधिकार माँगूँगा।
3. थानाध्यक्ष को शिकायत पत्र: सेवा में, थानाध्यक्ष महोदय, विषय: पशुओं के प्रति क्रूरता के संबंध में शिकायत। महोदय, हमारा नाम हीरा और मोती है। हम झूरी नामक किसान के बैल हैं। हमारे साथ घोर अन्याय हुआ है। झूरी के साले ‘गया’ ने हमें अत्यधिक पीटा और हमें भूखा रखा। उसके बाद काँजीहौस वालों ने भी हमें कई दिनों तक भूखा-प्यासा रखा और बाद में एक कसाई को नीलाम कर दिया। यह हमारे प्राणों और अधिकारों का खुला उल्लंघन है। कृपया आप दोषियों के विरुद्ध पशु क्रूरता अधिनियम के तहत सख्त कार्यवाही करें। सधन्यवाद, हीरा और मोती (झूरी के बैल)
हमारी धरोहर और संस्कृति
1. हीरा और मोती कौन-से कार्य कभी नहीं करते थे?
- उत्तर: वे निहत्थे या गिरे हुए दुश्मन पर कभी सींग नहीं चलाते थे, औरतों पर वार नहीं करते थे, और संकट की घड़ी में अपने मित्र को छोड़कर कभी नहीं भागते थे।
2. हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
- उत्तर: ये कथन भारतीय संस्कृति के उन उच्च नैतिक मूल्यों को दर्शाते हैं जिनमें शत्रु के प्रति भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाना (क्षमाशीलता), नारी का सदैव सम्मान करना, और विपत्ति में धर्म तथा संयम न त्यागने की शिक्षा दी गई है।
3. (क) कृषि के पारंपरिक और आधुनिक उपकरण:
- पारंपरिक: हल, फावड़ा, खुरपी, हँसिया, बैलगाड़ी।
- आधुनिक: ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, कल्टीवेटर, रोटावेटर, थ्रेशर। (ख) बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?
- खेतों की जुताई करने, बुवाई करने, बैलगाड़ी में फसल और सामान ढोने, कुएँ से पानी खींचने (रहट चलाने) और कोल्हू (तेल/गन्ना निकालने) के काम में।
अलग-अलग और साथ-साथ
1. हीरा और मोती की विशेषताएँ:
- हीरा: शांत, सहनशील, समझदार, धैर्यवान और उच्च आदर्शों वाला।
- मोती: गुस्सैल, उतावला, जोशीला, विद्रोही और त्वरित प्रतिकार करने वाला।
2. भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को कैसे पूरा करती हैं?
- उत्तर: जब मोती अत्यधिक क्रोध में आकर गलत कदम उठाने लगता था (जैसे गया को मारना या साँड़ पर अकेले हमला करना), तब हीरा अपने धैर्य से उसे शांत करता था। वहीं, जब हीरा की सहनशीलता कमजोरी बन जाती थी (काँजीहौस में कैद के समय), तब मोती अपने विद्रोही साहस से दीवार तोड़कर उनकी रक्षा करता था। इस प्रकार वे एक-दूसरे के पूरक थे।
3. सहपाठी से व्यवहार (छात्र अनुभव):
- उत्तर: मैं चाहूँगा कि मेरे भिन्न स्वभाव वाला सहपाठी मेरे शांत स्वभाव को मेरी कमज़ोरी न समझे। यदि मैं किसी विषय में कमज़ोर हूँ, तो वह मेरी मदद करे और मैं भी खेल या अन्य गतिविधियों में उसका साथ दूँ।
4. हीरा और मोती आपस में ‘मूक-भाषा’ में कैसे बातें करते होंगे?
- उत्तर: वे एक-दूसरे को सूंघकर, चाटकर, आँखों के इशारों (कनखियों) से देखकर, सींग मिलाकर, हुंकार भरकर या पूँछ हिलाकर आपस में अपनी भावनाएँ व्यक्त करते होंगे।
5. बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद (उदाहरण):
- उत्तर: जब कक्षा में शिक्षक पढ़ा रहे हों तो आँखों के इशारे से मित्र से बात करना; दूर से हाथ हिलाकर अभिवादन करना; या सहमति जताने के लिए केवल सिर हिलाना।
मार्ग खोजेंगे कैसे?
1. रास्ता भूलने पर मार्ग का पता (स्वयं का अनुभव):
- उत्तर: एक बार बाज़ार में भीड़ के कारण मैं रास्ता भटक गया था। तब मैंने घबराने के बजाय एक पुलिस वाले से मदद माँगी और एक दुकान के बोर्ड पर लिखे पते को देखकर अपने घर का सही रास्ता खोजा।
2. भटक जाने पर सुरक्षित गंतव्य तक पहुँचने के उपाय:
- उत्तर: घबराना नहीं चाहिए। सड़क पर लगे सूचना-पटों (Signboards) को पढ़ना चाहिए। किसी प्रतिष्ठित दुकान, बैंक, या पुलिस स्टेशन में जाकर मदद माँगनी चाहिए। यदि मोबाइल पास हो तो ऑनलाइन मैप का प्रयोग करना चाहिए।
सृजन (रचनात्मक लेखन)
1. हीरा/मोती की दैनंदिनी (डायरी):
- उत्तर: आज का दिन मेरे जीवन का सबसे कष्टदायक दिन रहा। मुझे और मोती को इस काँजीहौस की अँधेरी कोठरी में बंद कर दिया गया है। भूख से पेट में आग जल रही है, सारा दिन बीत गया पर खाने को एक तिनका तक नहीं मिला। यहाँ बंद बाकी जानवरों को मृतप्राय देखकर बहुत दुख होता है। गया की कैद से भागे तो यहाँ फँस गए। लेकिन मुझे विश्वास है कि हम हार नहीं मानेंगे, झूरी हमें लेने ज़रूर आएगा।
2. आज के समाचार:
- उत्तर: दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ, काँजीहौस से भाग निकले दर्जनों जानवर! काँजीहौस (दिनांक: २३ मार्च) – कल रात स्थानीय मवेशीखाने में एक अद्भुत घटना घटी। हाल ही में बंद किए गए दो मजबूत बैलों ने अपनी सींगों के प्रहार से काँजीहौस की पक्की दीवार ढहा दी। दीवार गिरते ही वहाँ कैद घोड़ियाँ, भैंसें और बकरियाँ भाग निकलीं। इससे कई पशुओं की जान बच गई। हैरत की बात यह रही कि इतना अवसर होने के बावजूद दोनों बैल वहीं खड़े मिले। काँजीहौस प्रशासन ने उन्हें कड़ी सज़ा देने की बात कही है।
3. कहानी का नया अंत:
- उत्तर: यदि हीरा और मोती झूरी के पास वापस न लौट पाते, तो दढ़ियल उन्हें कसाईखाने ले जाता। रास्ते में किसी पशु प्रेमी संस्था या पुलिस की उन पर नज़र पड़ जाती। दढ़ियल को पुलिस गिरफ्तार कर लेती और हीरा-मोती को एक विशाल गौशाला में भेज दिया जाता। वहां वे जीवनभर बिना किसी प्रताड़ना के हरी घास चरते और आराम से रहते।
4. चित्रकथा लेखन (संवाद):
- चित्र 1: मोती: “हीरा, भूख से मेरे प्राण निकल रहे हैं, यहाँ तो चारों तरफ मुर्दनी छाई है!” हीरा: “हिम्मत मत हारो, हमें यहाँ से निकलने का उपाय खोजना होगा।”
- चित्र 2: मोती (सींग मारते हुए): “मैं इस दीवार को गिराकर ही दम लूँगा, चाहे मेरी जान ही क्यों न चली जाए!”
- चित्र 3: मोती: “लो, दीवार गिर गई! तुम सब जल्दी भागो, अपनी जान बचाओ।”
- चित्र 4: (झूरी के द्वार पर) हीरा और मोती: “झूरी, हम आ गए! अब हम अपने घर में आज़ाद हैं।”
भाषा से संवाद: व्याकरण और मुहावरे
मेरे शब्द (5 नए शब्द और उनके अर्थ):
- निरापद: सुरक्षित, जिस पर कोई आपत्ति न हो।
- सहिष्णुता: सहनशीलता, कष्ट सहने की क्षमता।
- पराकाष्ठा: चरम सीमा, अंतिम छोर।
- विग्रह: अलगाव, फूट, या लड़ाई।
- टिटकार: मुँह से निकाली गई वह आवाज़ (टिक-टिक) जिससे बैलों को हांका जाता है।
भाषा गढ़ते मुहावरे (पहचान और वाक्य प्रयोग):
- “झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।”
- वाक्य: गणित की परीक्षा उत्तीर्ण करने में राजू को दाँतों पसीना आ गया।
- “उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।”
- वाक्य: सामने अचानक शेर को देखकर शिकारियों के दिल काँप उठे।
- “झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।”
- वाक्य: मेरी नई गाड़ी देखकर मेरी पड़ोसन जल उठी।
- “मोती दिल में ऐंठकर रह गया।”
- वाक्य: बॉस से बेइज्जती सहने के बाद कर्मचारी ऐंठकर रह गया।
- “आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। देखूँ कैसे ले जाता है।”
- वाक्य: अगर तुमने दोबारा मुझे परेशान किया, तो मैं तुम्हारी अच्छी खबर लूँगा।
- “जी तोड़कर काम करते हैं… चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।”
- वाक्य: गरीब मज़दूर मालिक की डाँट-फटकार सुनकर भी गम खा जाते हैं।
- “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते…”
- वाक्य: भारतीय सेना ने सीमा पर दुश्मनों को ईंट का जवाब पत्थर से दिया।
- “तो फिर यहीं मरो। बंदा तो नौ-दो ग्यारह होता है।”
- वाक्य: पुलिस को आते देख सभी चोर नौ-दो ग्यारह हो गए।
गतिविधियाँ
1. (क) कविता (गीत): हीरा मोती हमारे वीर, टूटी जिनकी रस्सियों की जंजीर। संकट में दोनों न घबराए, दूर देश से वापस आए। अपनी ताकत का लोहा मनवाए, झूरी के दिल को हर्षाए।
(ख) अभिनंदन-पत्र: प्रिय हीरा और मोती, गाँव की बाल-सभा आपकी अदम्य साहस, सच्ची मित्रता और स्वामीभक्ति के लिए आपका हार्दिक अभिनंदन करती है। आपके संघर्ष ने हमें यह सिखाया है कि स्वतंत्रता के लिए लड़ना कितना आवश्यक है। हम आपको नमन करते हैं।
2. बाल सभा में भाषण (पशुओं के अधिकार): आदरणीय मित्रों, आज हम हीरा और मोती के साहस और घर वापसी का जश्न मना रहे हैं। पर हमें यह भी विचार करना होगा कि पशु भी इंसानों की तरह दुख-दर्द महसूस करते हैं। पशुओं को भी सम्मान से जीने, भरपेट भोजन पाने और प्रेम का अधिकार है। हमें ‘गया’ जैसे क्रूर लोगों की तरह नहीं, बल्कि उस ‘छोटी बच्ची’ की तरह पशुओं से अपनत्व का व्यवहार करना चाहिए।
3. कहानी के पाँच भागों के शीर्षक:
- झूरी के बैल (हीरा-मोती का परिचय)
- गया के घर अत्याचार और विद्रोह
- साँड़ से महासंग्राम
- काँजीहौस में कैद और दीवार गिराना
- दढ़ियल से मुक्ति और घर वापसी
4. मेरी पहेली:
- “दो हैं भाई, रंग है सफेद, झूरी के दिल का मैं हूँ राजा।” – उत्तर: हीरा और मोती
- “खेत में खड़ी मेरी जवानी, हरे-हरे गोल दानों की मैं हूँ रानी।” – उत्तर: मटर