यहाँ ‘दो बैलों की कथा’ पाठ (लेखक: प्रेमचंद) के अभ्यास-प्रश्नों के सभी भागों के संपूर्ण उत्तर दिए गए हैं।

पाठ १ :- दो बैलों की कथा

रचना से संवाद: मेरे उत्तर मेरे तर्क (बहुविकल्पीय प्रश्न)

1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?

(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता

(ख) एकता और सहयोग

(ग) गर्व और दंभ

(घ) विद्रोह और क्रोध

2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?

(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।

(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।

(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।

(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।

3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?

(क) कष्टों से बचने के लिए

(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए

(ग) अभिमान की रक्षा के लिए

(घ) अपनापन पाने के लिए

4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?

(क) स्वाभिमान

(ख) अहिंसा

(ग) पराधीनता

(घ) अन्याय की रक्षा

5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?

(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए

(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए

(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए

(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए

6. ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?

(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के

(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के

(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के

(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के


मेरी समझ मेरे विचार

1. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?

2. “गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?

3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा- अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” ‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ इस कथन को सिद्ध कीजिए।

4. “जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।

5. “बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” ‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’- क्या आप इस कथन से सहमत हैं?

6. हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? तीन बिंदु लिखिए।

7. “उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।


मेरी कल्पना मेरे अनुमान

1. यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?

2. “दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप सहमत हैं?


मेरे अनुभव मेरे विचार

1. “दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है…।” क्या आप इस बात से सहमत हैं?

2. “गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए” बनाम “बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।” आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं?

3. “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” (अपने अनुभव के आधार पर उत्तर)


विधा से संवाद: कहानी की पड़ताल

कहानी की रूपरेखा पूरी कीजिए:


कहानी का सौंदर्य (तालिका)


कहानी की रचना

कहानी के प्रारंभ में संकेत:


विषयों से संवाद: कहानी का समय और समाज (मिलान)

  1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। -> 6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए।
  2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। -> 5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य।
  3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। -> 4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी।
  4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। -> 2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया।
  5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। -> 1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी।
  6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। -> 3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया।

पशुओं के लिए कानून

1. बैलों का काँजीहौस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?

2. आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?

3. थानाध्यक्ष को शिकायत पत्र: सेवा में, थानाध्यक्ष महोदय, विषय: पशुओं के प्रति क्रूरता के संबंध में शिकायत। महोदय, हमारा नाम हीरा और मोती है। हम झूरी नामक किसान के बैल हैं। हमारे साथ घोर अन्याय हुआ है। झूरी के साले ‘गया’ ने हमें अत्यधिक पीटा और हमें भूखा रखा। उसके बाद काँजीहौस वालों ने भी हमें कई दिनों तक भूखा-प्यासा रखा और बाद में एक कसाई को नीलाम कर दिया। यह हमारे प्राणों और अधिकारों का खुला उल्लंघन है। कृपया आप दोषियों के विरुद्ध पशु क्रूरता अधिनियम के तहत सख्त कार्यवाही करें। सधन्यवाद, हीरा और मोती (झूरी के बैल)


हमारी धरोहर और संस्कृति

1. हीरा और मोती कौन-से कार्य कभी नहीं करते थे?

2. हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?

3. (क) कृषि के पारंपरिक और आधुनिक उपकरण:


अलग-अलग और साथ-साथ

1. हीरा और मोती की विशेषताएँ:

2. भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को कैसे पूरा करती हैं?

3. सहपाठी से व्यवहार (छात्र अनुभव):

4. हीरा और मोती आपस में ‘मूक-भाषा’ में कैसे बातें करते होंगे?

5. बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद (उदाहरण):


मार्ग खोजेंगे कैसे?

1. रास्ता भूलने पर मार्ग का पता (स्वयं का अनुभव):

2. भटक जाने पर सुरक्षित गंतव्य तक पहुँचने के उपाय:


सृजन (रचनात्मक लेखन)

1. हीरा/मोती की दैनंदिनी (डायरी):

2. आज के समाचार:

3. कहानी का नया अंत:

4. चित्रकथा लेखन (संवाद):


भाषा से संवाद: व्याकरण और मुहावरे

मेरे शब्द (5 नए शब्द और उनके अर्थ):

  1. निरापद: सुरक्षित, जिस पर कोई आपत्ति न हो।
  2. सहिष्णुता: सहनशीलता, कष्ट सहने की क्षमता।
  3. पराकाष्ठा: चरम सीमा, अंतिम छोर।
  4. विग्रह: अलगाव, फूट, या लड़ाई।
  5. टिटकार: मुँह से निकाली गई वह आवाज़ (टिक-टिक) जिससे बैलों को हांका जाता है।

भाषा गढ़ते मुहावरे (पहचान और वाक्य प्रयोग):

  1. “झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।”
  1. “उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।”
  1. “झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।”
  1. “मोती दिल में ऐंठकर रह गया।”
  1. “आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। देखूँ कैसे ले जाता है।”
  1. “जी तोड़कर काम करते हैं… चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।”
  1. “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते…”
  1. “तो फिर यहीं मरो। बंदा तो नौ-दो ग्यारह होता है।”

गतिविधियाँ

1. (क) कविता (गीत): हीरा मोती हमारे वीर, टूटी जिनकी रस्सियों की जंजीर। संकट में दोनों न घबराए, दूर देश से वापस आए। अपनी ताकत का लोहा मनवाए, झूरी के दिल को हर्षाए।

(ख) अभिनंदन-पत्र: प्रिय हीरा और मोती, गाँव की बाल-सभा आपकी अदम्य साहस, सच्ची मित्रता और स्वामीभक्ति के लिए आपका हार्दिक अभिनंदन करती है। आपके संघर्ष ने हमें यह सिखाया है कि स्वतंत्रता के लिए लड़ना कितना आवश्यक है। हम आपको नमन करते हैं।

2. बाल सभा में भाषण (पशुओं के अधिकार): आदरणीय मित्रों, आज हम हीरा और मोती के साहस और घर वापसी का जश्न मना रहे हैं। पर हमें यह भी विचार करना होगा कि पशु भी इंसानों की तरह दुख-दर्द महसूस करते हैं। पशुओं को भी सम्मान से जीने, भरपेट भोजन पाने और प्रेम का अधिकार है। हमें ‘गया’ जैसे क्रूर लोगों की तरह नहीं, बल्कि उस ‘छोटी बच्ची’ की तरह पशुओं से अपनत्व का व्यवहार करना चाहिए।

3. कहानी के पाँच भागों के शीर्षक:

  1. झूरी के बैल (हीरा-मोती का परिचय)
  2. गया के घर अत्याचार और विद्रोह
  3. साँड़ से महासंग्राम
  4. काँजीहौस में कैद और दीवार गिराना
  5. दढ़ियल से मुक्ति और घर वापसी

4. मेरी पहेली:

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