
Taken From the notebook of
Mr. Danish Dhale
VI A – Narayana Vidyalaya, Chandrapur
पाठ १. मातृभूमि कवि – सोहनलाल द्विवेदी
शब्दार्थ :-
१) हिमालय : उत्तर भारत का विशाल पर्वत
२) सिंधु : एक पवित्र नदी
३) त्रिवेणी : वह जगह जहाँ तीन नदियाँ मिलती हैं (गंगा, यमुना, सरस्वती)
४) छटा : सुंदर दृश्य
५) पुण्य-भूमि : पवित्र भूमि
६) स्वर्ण-भूमि : सुनहरी भूमि
७) अमराइयाँ : आम के पेड़ का समूह
८) मलय पवन : दक्षिण से बहने वाली सुगंधित (हवा)
९) तन-मन : शरीर और मन
१०. रघुपति : भगवान राम का दूसरा नाम
११. सीता : श्री राम की पत्नी और एक पवित्र नारी
१२. श्रीकृष्ण : महाभारत के मुख्य पात्र और भगवान
१३. वंशी : बाँसुरी
१४. गीता : श्री कृष्ण द्वारा दिया गया उपदेश
१५. गौतम : भगवान बुद्ध
१६. सुयश : अच्छा यश
१७. दया : करुणा
१८. दिखाया : मार्गदर्शन किया
- प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।
प्र १) ‘जगमग छटा निराली, पग-पग छहर रही है’- पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उ:- ‘जगमग छटा निराली, पग-पग छहर रही है से कवि का आशय है कि भारत के इलाहाबाद में गंगा, यमुना एवं सरस्वती बह रही हैं। इन तीनों नदियों के संगम पर इनकी लहरें चारों ओर अपनी सुंदरता बिखेर देती हैं और नदियों का जल धरती को सींचता हुआ आगे बढ़ता है जिससे धरती हरी-भरी हो जाती है और फसलों रूपी सोना बिखेरती है। यह सौंदर्य सबको अपनी ओर आकर्षित करता है।
प्र २. भारत को पुण्यभूमि और स्वर्ण भूमि क्यों कहा गया है?
उत्तर: भारत ऋषि मुनियों का देश है, जिन्होंने आजीवन पवित्र जीवन का संदेश भारत को ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को दिया है। इन्होंने सत्य अहिंसा, मानवता, भाईचारे और दया आदि का संदेश चारों ओर फैलाया। इसलिए भारत भूमि को पुण्य भूमि कहा है। भारत नदियों का देश है, यहाँ की मिट्टी बहुत उपजाऊ है। इस कारण यहाँ भरपूर फ़सल होती है अर्थात् यहाँ की मिट्टी सोना उगलती है। यही कारण है कि इसे स्वर्णभूमि कहा जाता है।
३. कवि ने भारत की भूमि को युद्धभूमि और बुद्धभूमि क्यों कहा है?
उत्तर – कवि का यह मानना है कि भारत की धरती सदा संघर्षों की भूमि रही है। न जाने कितने शासकों ने भारत पर शासन किया लेकिन भारत ने अपने संघर्ष से अपनी सभ्यता और संस्कृति पर कभी आँच न आने दी। बुद्धभूमि से कवि का तात्पर्य है कि महात्मा बुद्ध ने भारतवासियों को प्रेम, दया, सहानुभूति एवं भाईचारे का संदेश पढ़ाया जो वर्तमान में ज्यों-का-त्यों है।
प्रश्न ४. एक भारतवासी होने के नाते हमारे क्या कर्तव्य हैं?
उत्तर: एक भारतवासी होने के नाते हमारे निम्नलिखित कर्तव्य बनते हैं –
१. भारतीय संस्कृति के अनुसार मेहमानों का आदर और बड़े-छोटे सभी कासभी का सम्मान करना चाहिए