Learnwell Smart Hindi Surabhi Class 4
पाठ-1: बने स्वर्ग-सा यह संसार (कविता)
प्रश्न: बालक इस दुनिया को कैसा बनाना चाहते हैं?
उत्तर: बालक इस दुनिया को स्वर्ग जैसा सुंदर बनाना चाहते हैं।
प्रश्न: बच्चों का मन कैसा होता है?
उत्तर: बच्चों का मन निर्मल, साफ़ और प्रसन्न होता है।
प्रश्न: हमारा धर्म क्या होना चाहिए?
उत्तर: सत्य ही हमारा धर्म होना चाहिए।
प्रश्न: बच्चों की इच्छा क्या है?
उत्तर: बच्चों की इच्छा है कि वे इस लायक बनें कि देश का यश-विस्तार कर सकें और धरती को स्वर्ग के समान बना सकें।
प्रश्न: इस दुनिया को स्वर्ग-सा सुंदर कैसे बनाया जा सकता है?
उत्तर: इस दुनिया को स्वर्ग-सा सुंदर बनाने के लिए हमें दूसरों की सेवा करनी चाहिए, सत्य व धर्म की राह पर चलना चाहिए और अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
प्रश्न: मानव का कर्म और धर्म क्या होना चाहिए?
उत्तर: मानव का कर्म विनयशील और दीन-दुखियों की मदद करने वाला होना चाहिए तथा धर्म सत्य और मानवता की सेवा करने वाला होना चाहिए।
प्रश्न: हमें अपने देश का मान-सम्मान कैसे बढ़ाना चाहिए?
उत्तर: हम अपने देश का मान-सम्मान अपने अच्छे कर्मों से बढ़ा सकते हैं।
यहाँ दी गई छवियों से निकाला गया पाठ नीचे दिया गया है:
कठिन शब्दों के अर्थ
- उदार – दयालू
- चित – मन
- निर्मल – साफ
- भेद – अंतर
- दीन – दलित – गरीब और सताया हुआ :
- यश – विस्तार – मान – सम्मान बढ़ाना
- उद्धार – कल्यान / कल्याण
- व्रत – संकल्प
- ध्येय – लक्ष्य
- कामना – इच्छा
- बारंबार – बार – बार ।
कविता की पंक्तियाँ पुरी कीजिए ।
-
- तन हो स्वस्थ, भुजा में बल हो,
- मन प्रसन्न हो, चित निर्मल हो
- बने ज्ञान-गुन के भंडार ।
- ध्येय सदा, कर्तव्य – कर्म हो
- यही कामना बारंबार ।
- बने स्वर्ग-सा यह संसार ॥
सही उत्तर चुनिए ।
- 1. हमारा जीवन कैसा होना चाहिए? -> सादा
- 2. हमारे विचार कैसे होने चाहिए ? -> उच्च
- 3. हमारा शरीर कैसा होना चाहिए ? -> स्वस्थ
- 4. हमें किसे गले लगाना चाहिए ? -> दीन – दलितों को
- 5. हमारा लक्ष्य क्या होना चाहिए ? -> अपना कर्तव्य करना
समान तुक वाले शब्द
- विचार – उदार
- भंडार – आधार
- भगाएँ – लगाएँ
- धर्म – कर्म
- विस्तार – उद्धार
- सत्य – असत्य
- यश –
विलोम शब्द
- सत्य X असत्य
- यश X अपयश
- स्वर्ग X नरक
- प्रसन्न X अप्रसन्न, दुखी
- स्वस्थ X अस्वस्थ
- जीवन X मरण
